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कभी पाकिस्तान से धीमी थी भारत की ग्रोथ रेट, हमारे देश की अर्थव्यवस्था ने कैसे पकड़ी रफ्तार और बना पड़ोसी से 10 गुना बड़ी इकोनॉमी?

 Written By: Priya Singh Somvanshi
 Published : Aug 14, 2026 06:23 pm IST,  Updated : Aug 14, 2026 06:25 pm IST

पाकिस्तान और भारत 79 साल पहले 1 दिन के अंतर पर अंग्रेजों से आजाद हुए थे लेकिन भारत जहां विकास के पथ पर बढ़ता गया तो पाकिस्तान कर्जे में डूब गया। जानिए पाकिस्तान, भारत जैसा विकास क्यों नहीं कर पाया।

14 और 15 अगस्त 1947 की वो आधी रात, जब सरहद की लकीर पर एक ही मिट्टी दो हिस्सों में बांटी जा रही थी। जब ब्रिटिश साम्राज्य ने भारतीय उपमहाद्वीप छोड़ा, तो नक्शे पर दो नए देश उभरे भारत और पाकिस्तान। दोनों के पास एक जैसा इतिहास था, एक जैसी जमीन थी और संसाधनों का बंटवारा भी एक साथ एक जैसे ही हुआ। दोनों को विरासत में मिली साझा संस्कृति, बहती नदियां और एक जैसी चुनौतियां भी लेकिन फिर समय का पहिया घूमा और सालों बाद आज एक तरफ भारत है जो दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, मंगल और चांद पर झंडे गाड़ रहा है और IT का ग्लोबल हब है। दुनिया की टॉप कंपनियों के बोर्डरूम्स को लीड कर रहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान है जो भारी कर्ज में डूबा हुआ है आटे की बोरी के लिए कतारों में खड़ा है, IMF की दहलीज पर कटोरा लिए बैठा है और कंगाली के अंधेरे में भटक रहा है और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।

कभी भारत से ज्यादा थी पाकिस्तान की GDP ग्रोथ रेट

सवाल यह है कि 1947 में एक साथ शुरू हुआ यह सफर इतना अलग कैसे हो गया? भारत आगे कैसे निकला और पाकिस्तान इतना कैसे पिछड़ गया। एक ही दिन शुरू हुई इस रेस में ऐसा क्या हुआ जिसने एक को महाशक्ति बना दिया और दूसरे को बदहाली की कगार पर ला खड़ा किया। शायद आपको जानकर हैरानी होगी कि आजादी के शुरुआती कुछ दशकों तक पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति कई पैमानों पर भारत से बेहतर थी। 1960 से 1980 के दशक तक पाकिस्तान का Per Capita Income भारत से ज्यादा था। 1960 और 70 के दशक में पाकिस्तान की GDP ग्रोथ रेट कई बार 6 से 8 प्रतिशत से ऊपर गई। कारण था अमेरिका ने कोल्ड वॉर के दौर में पाकिस्तान को भारी मात्रा में वित्तीय और सैन्य मदद दी। कराची को दक्षिण एशिया के सबसे आधुनिक शहरों में गिना जाने लगा था।

जब Food Security के संकट से जूझ रहा था भारत

भारत उस समय 3.5 फीसदी की धीमी विकास दर में फंसा हुआ था। भारत ने क्लोज्ड इकोनॉमी (Socialist Model) चुनी थी, लाइसेंस राज का दौर था और देश Food Security के संकट से जूझ रहा था। 1965 में सूखे और युद्ध के कारण भारत में अनाज की भारी कमी थी अमेरिका से मिलने वाले गेंहू पर अनिश्चितता थी। उस समय देश में पहला प्रयोग हुआ। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री अपने परिवार के साथ एक वक्त का खाना न खाने का व्रत रखकर शुरुआत की थी। उनके आह्वान पर पूरा देश स्वेच्छा से सप्ताह में एक दिन विशेषकर सोमवार की शाम उपवास रखने लगा जिसे 'शास्त्री व्रत' कहा गया।

LPG रिफॉर्म आने के बाद बदली भारत की किस्मत

इसी कठिन समय में उन्होंने 'जय जवान, जय किसान' का प्रसिद्ध नारा दिया, जिसने देश को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर किया था। भारत भले ही धीमा था, लेकिन उसने अपने लोकतंत्र, आईआईटी, आईआईएम जैसे संस्थानों को मजबूत करना शुरू कर दिया था। 1990 का दशक इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जब भारत में 1991 में LPG रिफॉर्म यानी Liberalization, Privatization और Globalization लागू हुआ।

जब भारत ने दुनिया के लिए खोले अपनी अर्थव्यवस्था के दरवाजे

दरअसल, 1991 में जब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की कगार पर था, तब भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था के दरवाजे दुनिया के लिए खोल दिए। लाइसेंस राज खत्म हुआ, प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा मिला और सर्विस सेक्टर, विशेषकर IT/Software उद्योग ने उड़ान भरी। वहीं, पाकिस्तान ने अपने उद्योगों का विविधीकरण (Diversification) नहीं किया। वह सिर्फ कपड़ा (Textiles) और कृषि पर निर्भर रहा।

अभी पाकिस्तान से 10 गुना ज्यादा है भारत की GDP

सबसे बड़ी बात ये है कि पाकिस्तान ने एजुकेशन और रिसर्च के बजाय डिफेंस पर अपनी जीडीपी का बड़ा हिस्सा खर्च करना जारी रखा। आज भारत की GDP (2025-26) 4.1 ट्रिलियन है जबकि पाकिस्तान की GDP (2025-26) में महज 400 बिलियन की है। यानी भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से 10 गुना से भी ज्यादा बड़ी है। भारत में 1947 से लेकर आज तक लोकतंत्र लगातार मजबूत रहा। नीतियां बदलीं, सरकारें बदलीं, लेकिन आर्थिक नीतियां आगे बढ़ती रहीं।

निवेशकों ने पाकिस्तान से मोड़ लिया मुंह

लेकिन पाकिस्तान में किसी भी चुने हुए प्रधानमंत्री ने अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया। सत्ता कभी सेना के पास रही तो कभी राजनीतिक अस्थिरता में उलझी रही। पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का हिस्सा बनाया, जिसका सबसे बड़ा नुकसान खुद उसकी अर्थव्यवस्था को हुआ। इंवेस्टर्स ने पाकिस्तान से मुंह मोड़ लिया। पाकिस्तान अपनी GDP का एक बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने और डिफेंस में खर्च करता है, जबकि भारत ने शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी में इंवेस्ट किया।

पाकिस्तान को लगी कर्ज लेकर देश चलाने की आदत

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को वर्षों तक अमेरिका और सऊदी अरब से Aid मिलती रही। बाद में उसने चीन का China-Pakistan Economic Corridor प्रोजेक्ट लिया, जो आज उसके लिए Debt Trap बन चुका है। पाकिस्तान ने Manufacturing करने के बजाय कर्ज लेकर देश चलाने की आदत डाल ली। आज भारत का मुकाबला पाकिस्तान से नहीं, बल्कि चीन और अमेरिका जैसी महाशक्तियों से है। भारत का लक्ष्य आने वाले सालों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है। भारत और पाकिस्तान अलग हुए, तो अंतर सिर्फ नक्शे की लकीरों का नहीं था, अंतर सोच का था।

भारत ने नफरत छोड़कर संस्थाओं को गढ़ा

भारत ने बंदूक की जगह किताबों को चुना, नफरत के बजाय संस्थाओं को गढ़ा और जंग के बजाय विकास की राह पकड़ी। वहीं दूसरी तरफ, पाकिस्तान एक ऐसा घर बन गया जिसकी नींव ही दूसरों के विरोध पर टिकी थी। पाकिस्तान आतंकियों को पालने के चक्कर में ये कभी समझ ही नहीं पाया कि जब तक कोई देश राजनीतिक स्थिरता, शिक्षा, और आंतरिक शांति को प्राथमिकता नहीं देता, तब तक विकास नामुमकिन है।

इतिहास हमें सिखाता है कि किसी भी देश का भविष्य उसकी बंदूकों से नहीं, बल्कि उसकी नीतियों, संस्थानों और नागरिकों की शिक्षा से तय होता है। लेकिन आज पाकिस्तान एक ऐसे दलदल में फंस चुका है जिससे निकलना उसके लिए नामुमकिन है। हाल में एक ऐसा मौका भी आया था जब पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने भारत की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने भारत के रणनीतिक तेल भंडार और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर तारीफ की थी।

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